Wednesday, February 26, 2020

सतपाल के लिए खंडूरी बने जरुरी

उत्तराखंड में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर भाजपा विधायक नाराज़ बताये जा रहे है ऐसे में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी से मुलाकात किया जाना उत्तराखंड की वर्त्तमान सियासत के लिहाज से बहुत कुछ बॉय कर रहा है देहरादून से लेकर दिल्ली तक उत्तराखंड के राजनैतिक समीकरण का करंट हमेशा नज़र आता रहा है लेकिन अब उत्तराखंड की सियासत में जिस तरह से सतपाल महाराज का पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी से उनके घर पर मुलाकात का लम्बा होना किसी खिचड़ी के पक जाने का इशारा तो नहीं या फिर ये महज एक ऐसी मुलाकात है जो कई सालो के बाद दोनों नेताओं को एक साथ लाने पर मजबूर कर गई है खबर ये भी वर्ष 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी के खिलाफ बगावत का डंडा लेकर आगे चलने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उन विधयाको में शामिल थे जो वर्ष 2008पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी का तख्ता पलट चुके थे


उत्तराखंड में सतपाल महाराज और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी कभी भी एक साथ नज़र नहीं आए दोनों राजनैतिक रूप से एक दूसरे के खिलाफ चुनाव भी लड़ते रहे है लम्बे समय से दोनों नेताओं के बीच सोमवार को जब मुलाकात के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो इसके दूसरे राजनैतिक अर्थ भी निकाले जाने शुरू हो गए है उत्तराखण्ड में बदलते राजनैतिक समीकरण की तरफ ये इशारा कर रहे है क्या उत्तराखंड में कोई ऐसे राजनैतिक खिचड़ी पक रही है जिसको बनाये जाने वाला मेजबान परदे के पीछे से अपना खेल कर रहा है

उत्तराखंड में राजनैतिक समीकरण के लिहाज से देखा जाये तो आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी इस बात पर भी मंथन कर रही है क्या आगामी चुनाव किसके नेतृत्र्व में लड़ा जाये उत्तराखंड के राजनैतिक हिसाब से देखा जाये तो अभी तक बीजेपी में जिस तरह का माहोल है उस राजनैतिक नज़र से आगामी चुनाव को फतह किये जाने के लिए किसी ऐसे राजनैतिक वयकति की तलाश जरुरी है जो उत्तराखंड में बीजेपी सरकार को 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए जरुरी बन जाये अगर समय रहते बीजेपी ने उत्तराखंड में जनता के बीच पसद किये जाने वाले को तलाश नहीं किया तो बीजेपी को उत्तराखंड में राजनैतिक नुकसान उठाये जाने से कोई नहीं रोक सकता