मंडुए की रोटी, भट्ट की चुड़कानी, झंगोरे की खीर भी होगी उपलब्ध।
देहरादून। नारायण परगांई। उŸाराखण्ड के लोक व्यंजनों की खुशबु अब सरकारी कैन्टीनो में नजर आएगी। यह उŸाराखण्ड में पहली बार होगा जब लोक व्यंजनो का लजीज स्वाद जनता चटकारे के साथ इन कैन्टीनों में ले सकेगी। इस योजना को मिड में दिए जाने वाले बच्चों के भोजन में भी लागू किए जाने की बातें सामने आ रही हैं और यह यदि मिड डे की बजाए लोक व्यंजनों को बच्चों के बीच परोसा गया तो जहां रोजगार के नए आयाम खुलेंगे वहीं इसका प्रचार प्रसार भी तेजी से हो सकेगा। लोक व्यंजनो की खुशबु वर्तमान में लगने वाले मेलों में देखने को देखने को मिलती थी जिसे बड़ी संख्या में लोगो द्वारा पसंद किया जाता था। इसके साथ ही पहाड़ी व्यंजनो का स्वाद फीका ना पड़ जाए इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने निर्देश जारी कर सभी सरकारी कैन्टीनो में लोकव्यंजनो को प्रमुखता से बनाने के निदेश संबन्धित अधिकारियो को दिए हैं। इसके साथ ही खान पान पर विशेष सावधानी बरतते हुए शुद्ध भोजन जनता को उपलब्ध कराने की बात भी कही है। अब तक लोकव्यंजनो का स्वाद पहाड़ी क्षेत्रों में तो शादी या अन्य समारोह में उपलब्ध हो जाता था और इन व्यंजनो का स्वाद सिर्फ पहाड़ तक ही सिमटा हुआ था जिस कारण लोक व्ंयजनो का स्वाद प्रदेश की जनता भरपूर तरीके से नही ले पा रही थी। घर पर बनाए जाने वाले लोक व्यंजन अब यदि आपको सरकारी कैन्टीनो मे मिलते हुए दिखे तो चैंकिएगा नही क्योकि प्रदेश सरकार ने अब कुमाउ व गढ़वाल के लोकव्यंजनो को सरकारी कैन्टीनो में उपलब्ध कराने का फरमान जारी कर दिया है। इसके साथ ही स्कूलो में मिड डे योजना के तहत स्कूली बच्चो को दिया जाने वाला भोजन बेहद खराब आंका जा रहा है जिसकी गम्भीरता को देखते हुए इन स्कूलो में स्कूली बच्चो को लोक व्यंजनो का स्वाद उपलब्ध कराने की बाते भी उठने लगी हैं। कुछ समय पूर्व स्कूलो में खाना बनाए जाने को लेकर विवाद की स्थिति भी उठ खड़ी हुई थी जिससे बच्चो को भारी परेशानियो का सामना करना पड़ा था लेकिन अब स्क्ूली बच्चो को लोक व्ंयजनो का स्वाद मिलने लगेगा तो इससे पहाड़ी व्यंजन और अधिक प्रचारित भी हो सकेगे। कुमाउ में बनाए जाने वाले लोकव्यंजनो में मंडुए की रोटी, भट्ट की चुड़कानी, डुपका, झोली, के साथ साथ गढ़वाल में झंगोरे की खीर, दालो की चैसनी, स्वाली, अरसा, थिचुड़ी, कनाली की सब्जी के साथ साथ अन्य व्यंजन अब आपको सरकारी कैन्टीनो में खाने को मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सरकारी अमला भी अब कैन्टीनो में उपलब्ध होने वाले खाने पर विशेष नजर रखेगा और यदि सरकारी कैन्टीनो में लोकव्यंजन नही मिले तो उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही भी की जा सकती ळै। इस व्यवस्था से जहां उŸाराखण्ड के लोक व्यंजन बनाने वाले लोगो को रोजगार मिलेगा वही लोकव्यंजनों की खुशबु से सरकारी कैन्टीने महक उठेंगी। इस योजना के लागू होने के बाद अब कोई भी उŸाराखण्डी अपने लोक व्यंजनों को खाए बिना नही रह सकेगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री जल्द ही कई ऐसी योजनाओ को भी लागू कर सकते हैं जो जनता का दिल जीत सकती हैं।
देहरादून। नारायण परगांई। उŸाराखण्ड के लोक व्यंजनों की खुशबु अब सरकारी कैन्टीनो में नजर आएगी। यह उŸाराखण्ड में पहली बार होगा जब लोक व्यंजनो का लजीज स्वाद जनता चटकारे के साथ इन कैन्टीनों में ले सकेगी। इस योजना को मिड में दिए जाने वाले बच्चों के भोजन में भी लागू किए जाने की बातें सामने आ रही हैं और यह यदि मिड डे की बजाए लोक व्यंजनों को बच्चों के बीच परोसा गया तो जहां रोजगार के नए आयाम खुलेंगे वहीं इसका प्रचार प्रसार भी तेजी से हो सकेगा। लोक व्यंजनो की खुशबु वर्तमान में लगने वाले मेलों में देखने को देखने को मिलती थी जिसे बड़ी संख्या में लोगो द्वारा पसंद किया जाता था। इसके साथ ही पहाड़ी व्यंजनो का स्वाद फीका ना पड़ जाए इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने निर्देश जारी कर सभी सरकारी कैन्टीनो में लोकव्यंजनो को प्रमुखता से बनाने के निदेश संबन्धित अधिकारियो को दिए हैं। इसके साथ ही खान पान पर विशेष सावधानी बरतते हुए शुद्ध भोजन जनता को उपलब्ध कराने की बात भी कही है। अब तक लोकव्यंजनो का स्वाद पहाड़ी क्षेत्रों में तो शादी या अन्य समारोह में उपलब्ध हो जाता था और इन व्यंजनो का स्वाद सिर्फ पहाड़ तक ही सिमटा हुआ था जिस कारण लोक व्ंयजनो का स्वाद प्रदेश की जनता भरपूर तरीके से नही ले पा रही थी। घर पर बनाए जाने वाले लोक व्यंजन अब यदि आपको सरकारी कैन्टीनो मे मिलते हुए दिखे तो चैंकिएगा नही क्योकि प्रदेश सरकार ने अब कुमाउ व गढ़वाल के लोकव्यंजनो को सरकारी कैन्टीनो में उपलब्ध कराने का फरमान जारी कर दिया है। इसके साथ ही स्कूलो में मिड डे योजना के तहत स्कूली बच्चो को दिया जाने वाला भोजन बेहद खराब आंका जा रहा है जिसकी गम्भीरता को देखते हुए इन स्कूलो में स्कूली बच्चो को लोक व्यंजनो का स्वाद उपलब्ध कराने की बाते भी उठने लगी हैं। कुछ समय पूर्व स्कूलो में खाना बनाए जाने को लेकर विवाद की स्थिति भी उठ खड़ी हुई थी जिससे बच्चो को भारी परेशानियो का सामना करना पड़ा था लेकिन अब स्क्ूली बच्चो को लोक व्ंयजनो का स्वाद मिलने लगेगा तो इससे पहाड़ी व्यंजन और अधिक प्रचारित भी हो सकेगे। कुमाउ में बनाए जाने वाले लोकव्यंजनो में मंडुए की रोटी, भट्ट की चुड़कानी, डुपका, झोली, के साथ साथ गढ़वाल में झंगोरे की खीर, दालो की चैसनी, स्वाली, अरसा, थिचुड़ी, कनाली की सब्जी के साथ साथ अन्य व्यंजन अब आपको सरकारी कैन्टीनो में खाने को मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सरकारी अमला भी अब कैन्टीनो में उपलब्ध होने वाले खाने पर विशेष नजर रखेगा और यदि सरकारी कैन्टीनो में लोकव्यंजन नही मिले तो उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही भी की जा सकती ळै। इस व्यवस्था से जहां उŸाराखण्ड के लोक व्यंजन बनाने वाले लोगो को रोजगार मिलेगा वही लोकव्यंजनों की खुशबु से सरकारी कैन्टीने महक उठेंगी। इस योजना के लागू होने के बाद अब कोई भी उŸाराखण्डी अपने लोक व्यंजनों को खाए बिना नही रह सकेगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री जल्द ही कई ऐसी योजनाओ को भी लागू कर सकते हैं जो जनता का दिल जीत सकती हैं।
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